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सिर पर सवार होना, अर्थ, प्रयोग(Sir par sawar hona)

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परिचय: “सिर पर सवार होना” एक प्रसिद्ध हिंदी मुहावरा है जिसे अक्सर व्यक्ति की चिंताओं, तनाव, या ज्यादा भार के संकेत में प्रयोग किया जाता है।

अर्थ: किसी समस्या, चिंता या किसी भार को महसूस करना।

उदाहरण:

-> अभय इन दिनों अपने व्यापार में नुकसान होने की चिंता से सिर पर सवार हो गयी है।

-> पूजा अपनी सहेली से पैसे वसूलने के लिए उसके सिर पर सवार हो गयी है।

विवेचना: जब कोई व्यक्ति किसी विषय में अधिक चिंतित होता है या उसे अधिक भार महसूस होता है, तो “सिर पर सवार होना” मुहावरे का प्रयोग किया जाता है। यह इस बात को दर्शाने के लिए है कि वह व्यक्ति किसी समस्या या चिंता को अपने ऊपर बोझ समझ रहा है।

निष्कर्ष: “सिर पर सवार होना” मुहावरा हमें यह बताता है कि जीवन में कई बार हमें ऐसी स्थितियाँ सामना करनी पड़ती हैं जब हम अपनी समस्याओं और चिंताओं को बहुत अधिक भार समझते हैं। इसलिए, इस मुहावरे का प्रयोग हमें चाहिए जब हम अपनी या दूसरों की चिंताओं और तनाव को व्यक्त करना चाहते हैं।

सिर पर सवार होना मुहावरा पर कहानी:

सुरेंद्र और विनीत बचपन के दोस्त थे। दोनों ने कई बार एक दूसरे की मदद की थी। लेकिन एक बार, सुरेंद्र ने विनीत से कुछ पैसे उधार मांग लिए थे। वह उस समय में आर्थिक संकट से जूझ रहा था। विनीत ने बिना सोचे-समझे पैसे दे दिए और सुरेंद्र ने वादा किया कि वह अगले महीने वापस कर देगा।

महीना बीत गया, लेकिन सुरेंद्र ने पैसे वापस नहीं किए। विनीत को अब उसके पैसों की चिंता होने लगी। वह रोज सुरेंद्र को याद दिलाने लगा कि उसे पैसे वापस करने हैं। लेकिन सुरेंद्र हर बार एक नया बहाना बना लेता।

अब विनीत को लगा सुरेंद्र पैसे नहीं देगा, इसलिए वह सुरेंद्र के सिर पर सवार हो गया। वह रोज सुरेंद्र को बोलता की उसे उसके पैसे वापस कर दे। उसे लगता था कि वह अपने पैसों के बिना आर्थिक समस्या में पड़ जाएगा।

एक दिन विनीत ने ठान लिया कि वह सुरेंद्र से सीधे बात करेगा। वह सुरेंद्र के पास गया और उससे कहा, “सुरेंद्र, तुम मुझे पैसे लौटा रहे हो या नहीं। मेरे पैसे जल्दी वापस करो।”

सुरेंद्र समझ गया कि उसकी लापरवाही से विनीत कितना परेशान हो रहा है। वह माफी मांगता हुआ विनीत को उसके पैसे वापस कर दिया।

इस कहानी से हमें यह सिखने को मिलता है कि हमें अपने वादों का पालन करना चाहिए और दूसरों को परेशान नहीं होने देना चाहिए।

शायरी:

जब सिर पर सवार हो जाए चिंता की बातें,

हर कोने में बस जाए अधूरी रातें।

पर जैसे हर दर्द में छुपा होता है एक गीत, 

जीवन चलता रहता है, फिर भी मिलती रहती है मिठास।

 

सिर पर सवार होना शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of सिर पर सवार होना – Sir par sawar hona Idiom:

Introduction: “Sir par sawar hona” is a renowned Hindi idiom often used to indicate the worries, tensions, or excessive burdens of a person.

Meaning: Feeling the weight of a problem, concern, or burden.

Examples:

-> These days, due to losses in his business, Abhay feels as if worries are riding on his head (Sir par sawar ho gayi hai). 

-> Pooja is constantly on her friend’s case to recover her money, as if the concern has taken over her (Sir par sawar ho gayi hai).

Analysis: When a person is excessively concerned about a matter or feels burdened, the phrase “Sir par sawar hona” is utilized. It portrays that the individual perceives a concern or problem as a heavy weight upon them.

Conclusion: The idiom “Sir par sawar hona” conveys that in life, there are times when we face situations where we perceive our problems and worries as immense burdens. Hence, this phrase should be used when one wants to express their or others’ anxieties and stresses.

Story of ‌‌Sir par sawar hona Idiom in English:

Surendra and Vineet were childhood friends. They had helped each other on numerous occasions. However, once, Surendra borrowed some money from Vineet. He was grappling with financial issues at that time. Without much thought, Vineet lent him the money, and Surendra promised to repay him the next month.

A month passed, but Surendra didn’t return the money. Vineet started to get worried about his finances. He began reminding Surendra daily about repaying the debt. However, every time, Surendra would come up with a new excuse.

Vineet felt as if Surendra was avoiding him and started hounding Surendra for his money. He believed he would face financial problems without that money.

One day, Vineet decided to confront Surendra directly. He went to him and said, “Surendra, are you returning my money or not? Return my money quickly.”

Realising the distress he had caused Vineet due to his negligence, Surendra apologised and immediately repaid Vineet.

This story teaches us that we should honour our commitments and not cause distress to others.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

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