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पास में पैसा तो सुखचैन कैसा अर्थ, प्रयोग (Paas mein paisa to sukhchain kaisa)

परिचय: हिंदी भाषा समृद्ध मुहावरों से भरपूर है, जो जीवन के विविध पहलुओं पर प्रकाश डालते हैं। “पास में पैसा तो सुखचैन कैसा” एक ऐसा ही मुहावरा है जो धन और सुख-शांति के बीच के संबंध पर चिंतन करता है।

अर्थ: इस मुहावरे का सीधा अर्थ है कि जब व्यक्ति के पास बहुत अधिक धन होता है, तो उसे सच्चा सुख और चैन नहीं मिल पाता। यह धन के अधिकता के प्रभाव पर विचार करता है और बताता है कि कैसे अत्यधिक धन होने से मानवीय मूल्य और आंतरिक शांति प्रभावित हो सकती है।

प्रयोग: इस मुहावरे का प्रयोग अक्सर उन स्थितियों में होता है जहाँ धन के कारण व्यक्ति के जीवन में तनाव और असंतोष का वर्णन किया जाता है। यह धन और संतोष के बीच के जटिल संबंधों को दर्शाता है।

उदाहरण:

-> “वह व्यापारी धनवान तो बहुत है पर उसका जीवन चिंताओं से भरा हुआ है, सच में पास में पैसा तो सुखचैन कैसा।”

-> “अमीरों की जिंदगी देखकर लगता है कि पास में पैसा तो सुखचैन कैसा।”

निष्कर्ष: “पास में पैसा तो सुखचैन कैसा” मुहावरा हमें यह सिखाता है कि केवल धन ही जीवन में सुख और शांति का स्रोत नहीं होता। यह उस सोच को चुनौती देता है जो कहती है कि धन से सभी समस्याएं हल हो जाती हैं। यह मुहावरा हमें बताता है कि धन के साथ-साथ आंतरिक संतुष्टि और शांति की भी अहमियत है।

पास में पैसा तो सुखचैन कैसा मुहावरा पर कहानी:

एक शहर में प्रेमचंद्र नाम का एक व्यापारी रहता था। प्रेमचंद्र बहुत मेहनती और धनी था, लेकिन उसके चेहरे पर कभी खुशी नहीं दिखती थी। उसके पास ढेर सारा पैसा और संपत्ति थी, लेकिन वह हमेशा चिंतित और तनावग्रस्त रहता था।

प्रेमचंद्र की इस स्थिति को देखकर उसके पुराने मित्र सोहन ने एक दिन उससे पूछा, “तुम्हारे पास तो सब कुछ है, फिर भी तुम इतने असंतुष्ट क्यों हो?” प्रेमचंद्र ने जवाब दिया, “मेरे पास जितना पैसा है, मुझे उसे बचाने और बढ़ाने की चिंता हमेशा सताती है। मैं ना तो चैन से सो पाता हूँ और ना ही सुकून से जी पाता हूँ।”

सोहन ने मुस्कुराते हुए कहा, “तुमने सुना नहीं है कि ‘पास में पैसा तो सुखचैन कैसा’? जीवन में सिर्फ पैसा ही सब कुछ नहीं होता। सच्चा सुख और शांति तो आंतरिक संतुष्टि से आती है।”

प्रेमचंद्र को सोहन की बातों पर गहराई से विचार करने के बाद एहसास हुआ कि वह धन के पीछे भागते-भागते जीवन की असली खुशियों को भूल गया था। उसने फिर अपनी जिंदगी में बदलाव किया और धन के साथ-साथ आत्मिक शांति और संतुष्टि पर भी ध्यान देना शुरू किया।

इस कहानी से हमें सिखने को मिलता है कि धन भले ही आवश्यक हो, लेकिन सच्चा सुख और शांति तो मन की संतुष्टि और आत्म-शांति में ही निहित है। अतः “पास में पैसा तो सुखचैन कैसा” का संदेश है कि केवल धन से जीवन की सभी खुशियाँ नहीं मिल सकतीं।

शायरी:

पैसे की चमक में, अक्सर दिल खो जाता है,

“पास में पैसा तो सुखचैन कैसा”, ये सवाल रह जाता है।

धन के ढेर में भी, आत्मा अकेली रहती है,

सुख की तलाश में, जिंदगी यूँही बहती है।

माया के इस जाल में, हर खुशी उलझी हुई,

जेब भरी है पैसों से, पर आँखों में कशिश अधूरी हुई।

धन की ये दौड़ है, पर चैन कहीं खो गया,

“पास में पैसा तो सुखचैन कैसा”, ये सोच मन को रो गया।

धन के इस खेल में, सच्चा सुख कोई ना पाया,

पैसों का क्या है, यह तो आता-जाता साया।

इसलिए जीवन में, धन से ज्यादा खुशियों को चुनो,

“पास में पैसा तो सुखचैन कैसा”, इस सवाल का जवाब खुद में ढूंढो।

 

पास में पैसा तो सुखचैन कैसा शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।

Hindi to English Translation of पास में पैसा तो सुखचैन कैसा – Paas mein paisa to sukhchain kaisa Idiom:

Introduction: The Hindi language is rich with idioms that shed light on various aspects of life. “पास में पैसा तो सुखचैन कैसा” is one such idiom that contemplates the relationship between wealth and peace of mind.

Meaning: The direct meaning of this idiom is that when a person has a lot of money, they may not find true happiness and peace. It reflects on the impact of excess wealth and suggests how excessive money can affect human values and inner peace.

Usage: This idiom is often used in situations where a person’s life is described as stressful and dissatisfied due to wealth. It portrays the complex relationship between money and contentment.

Example:

-> “That businessman is very wealthy but his life is filled with worries, truly illustrating ‘पास में पैसा तो सुखचैन कैसा.'”

-> “Looking at the lives of the rich, it seems ‘पास में पैसा तो सुखचैन कैसा.'”

Conclusion: The idiom “पास में पैसा तो सुखचैन कैसा” teaches us that wealth alone is not the source of happiness and peace in life. It challenges the notion that money solves all problems. This phrase tells us that along with wealth, inner satisfaction and peace are also important.

Story of ‌‌Paas mein paisa to sukhchain kaisa Idiom in English:

In a city, there lived a businessman named Premchandra. Premchandra was very hardworking and wealthy, but happiness never seemed to grace his face. He had a lot of money and property, yet he was always worried and stressed.

Seeing Premchandra’s condition, his old friend Sohan asked him one day, “You have everything, why are you still so dissatisfied?” Premchandra replied, “The more money I have, the more I worry about saving and increasing it. I can neither sleep peacefully nor live comfortably.”

Sohan smiled and said, “Haven’t you heard ‘पास में पैसा तो सुखचैन कैसा’? Money is not everything in life. True happiness and peace come from inner satisfaction.”

After deeply considering Sohan’s words, Premchandra realized that in the pursuit of wealth, he had forgotten the real joys of life. He then changed his life and started focusing not just on wealth, but also on spiritual peace and contentment.

This story teaches us that although money is necessary, true happiness and peace are found in mental satisfaction and inner peace. Hence, the message of “पास में पैसा तो सुखचैन कैसा” is that life’s true joys cannot be found in wealth alone.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly

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