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बिल्ली और दूध की रखवाली?, अर्थ, प्रयोग(Billi aur doodh ki rakhwali?)

परिचय: “बिल्ली और दूध की रखवाली?” यह एक लोकप्रिय हिंदी कहावत है, जो विरोधाभासी परिस्थितियों और असंगत जिम्मेदारियों के बारे में बताती है। इस कहावत का उपयोग अक्सर तब होता है जब किसी व्यक्ति या स्थिति पर विश्वास करना अनुचित हो।

अर्थ: इस कहावत का मूल अर्थ है कि अगर बिल्ली को दूध की रखवाली सौंपी जाए, तो यह अपेक्षा करना व्यर्थ है कि दूध सुरक्षित रहेगा। यहां बिल्ली को दूध की रखवाली सौंपना, ऐसी स्थिति का प्रतीक है जहां विश्वास की जिम्मेदारी उसी पर डाली जाती है जो उसे भंग कर सकता है।

उपयोग: इस कहावत का उपयोग तब किया जाता है जब किसी ऐसे व्यक्ति को किसी महत्वपूर्ण कार्य की जिम्मेदारी दी जाती है, जिसके लिए वह उपयुक्त नहीं होता।

उदाहरण:

-> मान लीजिए एक कंपनी में एक ऐसे व्यक्ति को वित्तीय लेखा-जोखा संभालने की जिम्मेदारी दी गई, जिसका इतिहास धन के दुरुपयोग का रहा हो। इस स्थिति में कहा जा सकता है कि यह “बिल्ली और दूध की रखवाली?” जैसा है।

निष्कर्ष: “बिल्ली और दूध की रखवाली?” कहावत हमें सिखाती है कि हमें जिम्मेदारियाँ सोच-समझकर और उपयुक्त व्यक्ति को सौंपनी चाहिए। गलत व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपना न केवल असफलता की ओर ले जा सकता है, बल्कि यह बड़े नुकसान का कारण भी बन सकता है।

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बिल्ली और दूध की रखवाली? कहावत पर कहानी:

एक छोटे से गाँव में विकास नाम का एक दुकानदार रहता था। विकास की दुकान में अनेक प्रकार के मूल्यवान सामान बिकते थे। एक दिन, विकास को कुछ दिनों के लिए गाँव से बाहर जाना पड़ा। उसे अपनी दुकान की रखवाली के लिए किसी भरोसेमंद व्यक्ति की तलाश थी।

इसी दौरान, गाँव में नया आया एक व्यक्ति, अभय, जो स्वयं को बहुत ईमानदार बताता था, ने विकास से संपर्क किया। अभय ने विकास को भरोसा दिलाया कि वह उसकी दुकान का अच्छे से ध्यान रखेगा। विकास ने बिना अभय के बारे में ज्यादा जाने-समझे उसे दुकान की चाबी सौंप दी।

विकास के जाने के बाद, अभय ने अपना असली रूप दिखाया। वह दरअसल एक चतुर चोर था और विकास की अनुपस्थिति में उसने दुकान से कई मूल्यवान सामान चुरा लिए। जब विकास वापस आया, तो उसने देखा कि उसकी दुकान लगभग खाली हो चुकी थी।

इस घटना से विकास को बहुत बड़ा सबक मिला। उसे समझ आया कि “बिल्ली को दूध की रखवाली” सौंपने जैसा था अभय को दुकान की जिम्मेदारी सौंपना। वह समझ गया कि बिना पूरी जानकारी और विश्वास के किसी पर भरोसा करना कितना जोखिम भरा हो सकता है।

निष्कर्ष:

विकास की कहानी हमें यह सिखाती है कि जिम्मेदारियाँ सौंपते समय हमें बहुत सावधानी बरतनी चाहिए। गलत व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपने से न केवल हम असफलता को आमंत्रित करते हैं, बल्कि यह हमारे लिए बड़े नुकसान का कारण भी बन सकता है।

शायरी:

बिल्ली को सौंप दी दूध की रखवाली,

जैसे खुद ने अपने पाँव पे कुल्हाड़ी डाली।

जिंदगी की इस बाजी में, सच्चाई का दामन थामे रखना,

विश्वास की डोर को, हर शख्स पे नहीं डालना।

विश्वास का खेल बड़ा नाजुक होता है,

बिल्ली के हाथ में दूध, जैसे फसाना होता है।

दुनिया की राहों में, हर शख्स से भरोसा न करना,

बिना सोचे समझे, किसी को अपना मान न देना।

विश्वास और भरोसा, ये दोनों अनमोल हैं,

बिल्ली के हाथ में दूध, ये कहानी सबकी बोल हैं।

जिसे भरोसा करो, उसका चयन सोच समझ कर करना,

वरना जिंदगी के मेले में, अकेले ही रह जाना।

बिल्ली को सौंप दी दूध की रखवाली,

ये किस्सा नहीं, जिंदगी की एक सच्चाई।

इस दुनिया में, हर किसी पे आँख मूंद कर न भरोसा करना,

वरना अपने ही घर में, बिल्ली जैसे दुश्मन पाल लेना।

 

बिल्ली और दूध की रखवाली? शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of बिल्ली और दूध की रखवाली? – Billi aur doodh ki rakhwali? Proverb:

Introduction: “Billi aur doodh ki rakhwali?” is a popular Hindi proverb, which talks about paradoxical situations and incompatible responsibilities. This proverb is often used when it’s inappropriate to trust a person or situation.

Meaning: The basic meaning of this proverb is that if a cat is assigned to guard the milk, it’s futile to expect that the milk will remain safe. Billi aur doodh ki rakhwali? symbolizes a situation where the responsibility of trust is given to someone who can easily breach it.

Usage: This proverb is used when an important task is entrusted to someone who is not suitable for it.

Examples:

-> Suppose in a company, a person with a history of misusing funds is given the responsibility of handling financial accounts. In this situation, it can be said that it’s like “Billi aur doodh ki rakhwali?”

Conclusion: The proverb “Billi aur doodh ki rakhwali?” teaches us that responsibilities should be assigned thoughtfully and to the right person. Assigning responsibility to the wrong person can not only lead to failure but also cause significant harm.

Story of Billi aur doodh ki rakhwali? Proverb in English:

In a small village, there lived a shopkeeper named Vikas. Vikas’s shop sold various valuable items. One day, Vikas had to leave the village for a few days. He was in search of a trustworthy person to look after his shop.

During this time, a new person in the village, Abhay, who claimed to be very honest, approached Vikas. Abhay assured Vikas that he would take good care of his shop. Without knowing much about Abhay, Vikas handed over the keys to his shop.

After Vikas left, Abhay revealed his true colors. He was actually a cunning thief and, in Vikas’s absence, stole many valuable items from the shop. When Vikas returned, he found his shop nearly empty.

This incident was a big lesson for Vikas. He realized that entrusting Abhay with his shop was like “assigning the cat to guard the milk.” He understood that trusting someone without complete information and confidence can be very risky.

Conclusion:

Vikas’s story teaches us that we should be very careful while assigning responsibilities. Entrusting the wrong person can not only invite failure but also lead to significant losses.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQs:

इस कहावत का प्रयोग कब किया जाता है?

जब किसी ऐसे व्यक्ति को किसी कार्य की जिम्मेदारी सौंपी जाती है जो स्वयं उस कार्य में भ्रष्ट या अयोग्य हो, तब इस कहावत का प्रयोग किया जाता है।

क्या इस कहावत का प्रयोग केवल नकारात्मक अर्थ में होता है?

ज्यादातर मामलों में इसका प्रयोग नकारात्मक संदर्भ में होता है।

क्या इस कहावत का अन्य भाषाओं में भी समानार्थी मिलता है?

हां, अन्य भाषाओं में भी इसी प्रकार की कहावतें हैं जो अयोग्य व्यक्ति को जिम्मेदारी सौंपने के विचार को दर्शाती हैं।

“बिल्ली और दूध की रखवाली” का सामाजिक महत्व क्या है?

यह कहावत सामाजिक व्यवस्था में उचित और अनुचित जिम्मेदारी के आवंटन के प्रति जागरूकता लाने में महत्वपूर्ण है और लोगों को जिम्मेदारी और योग्यता के महत्व के प्रति सचेत करती है।

क्या यह कहावत आज भी प्रासंगिक है?

हां, यह कहावत आज भी प्रासंगिक है क्योंकि अयोग्यता और अनुचित जिम्मेदारी की स्थितियाँ आज भी समाज में देखी जाती हैं।

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