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बासी कढ़ी में उबाल नहीं आता, अर्थ, प्रयोग(Basi kadhi mein ubaal nahi aata)

परिचय: “बासी कढ़ी में उबाल नहीं आता” यह हिंदी मुहावरा जीवन और समाज के संदर्भ में पुराने और निष्क्रिय विचारों या प्रथाओं की अप्रासंगिकता को दर्शाता है। यह बताता है कि जो चीजें समय के साथ पुरानी पड़ चुकी हैं, उनमें नवीनता या उत्साह की कमी होती है।

अर्थ: इस मुहावरे का शाब्दिक अर्थ है कि जिस तरह बासी कढ़ी (पुरानी और ठंडी हो चुकी कढ़ी) में उबाल नहीं आता, उसी तरह पुराने और अप्रचलित विचारों में नयापन या ऊर्जा नहीं होती।

उपयोग: यह मुहावरा उन परिस्थितियों में प्रयोग किया जाता है जब कोई पुरानी रीति या विचारधारा समकालीन संदर्भ में प्रभावी नहीं होती।

उदाहरण:

-> समाज में कुछ पुरानी प्रथाएँ जो आज के समय में उपयोगी नहीं हैं, उन पर इस मुहावरे का प्रयोग किया जा सकता है।

-> किसी संगठन में पुरानी और अप्रभावी कार्यप्रणाली पर भी इस मुहावरे का इस्तेमाल हो सकता है।

समापन: “बासी कढ़ी में उबाल नहीं आता” मुहावरा हमें सिखाता है कि जीवन और समाज में हमेशा नवीनता और प्रासंगिकता की आवश्यकता होती है। पुराने विचारों और प्रथाओं को समय के साथ अपडेट करने की जरूरत होती है ताकि वे नए और समकालीन चुनौतियों का सामना कर सकें। यह हमें बताता है कि विकास के लिए लगातार परिवर्तन और नवीनीकरण आवश्यक है।

Hindi Muhavare Quiz

बासी कढ़ी में उबाल नहीं आता कहावत पर कहानी:

एक बार की बात है, एक छोटे से गाँव में विकास नाम का एक युवा रहता था। विकास ने शहर से पढ़ाई करके अपने गाँव को वापस आया था। उसने देखा कि गाँव में बहुत सी पुरानी प्रथाएँ और तरीके अब भी प्रचलित थे, जो कि समय के साथ प्रभावी नहीं रहे थे।

एक दिन गाँव में एक बैठक हुई, जिसमें गाँव के विकास की बात हो रही थी। विकास ने सुझाव दिया कि गाँव की पारंपरिक कृषि पद्धतियों को बदलकर आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाए। लेकिन गाँव के बुजुर्गों ने उसके सुझाव को खारिज कर दिया और कहा कि पुरानी पद्धतियाँ ही बेहतर हैं।

विकास ने तब कहा, “बासी कढ़ी में उबाल नहीं आता। हमें अपने पुराने तरीकों को छोड़कर नए तरीके अपनाने चाहिए, जो कि समय के साथ प्रभावी और उपयोगी हों।”

विकास ने अपने खेत में आधुनिक तकनीकों का इस्तेमाल किया और कुछ ही समय में उसके खेतों की पैदावार में भारी बढ़ोतरी हुई। देखते-देखते, गाँव के अन्य किसान भी विकास के तरीकों को अपनाने लगे।

इस कहानी से हमें सिखने को मिलता है कि समय के साथ बदलाव जरूरी है और पुरानी और अप्रभावी प्रथाओं को छोड़कर नए और प्रभावी तरीकों को अपनाना चाहिए। “बासी कढ़ी में उबाल नहीं आता” का अर्थ है कि पुराने तरीके समय के साथ अप्रभावी हो जाते हैं।

शायरी:

बासी कढ़ी में उबाल का क्या जिक्र करें हम,
जो बीत गया कल, उसे क्यों फिर से उभारें हम।
नया दौर, नई बातें, नई ख्वाहिशों का है जमाना,
पुरानी रीत से क्या हासिल, जब नयी राहों पे चलना है ठाना।

हर गुजरे पल की यादें, बस यादें होती हैं,
बीते कल के घूरे में, नया उबाल कहाँ होती है।
चलो नई राहों पे, नए ख्वाब सजाएं,
बासी कढ़ी की बातें, क्यों आज में लाएं।

जो बीत गया है, उसे बीत जाने दो,
नये जज्बे से, नई कहानियां बनाने दो।
बासी कढ़ी की तरह, अतीत में न अटके रहो,
नए उफ़क पे नज़रें गड़ा, नई मंजिलें तलाशो।

इस जीवन की राह में, हर पल नया होता है,
‘बासी कढ़ी में उबाल नहीं’, ये सबक हमें यही सिखाता है।
चलो आगे बढ़ें, नई सोच के साथ,
जीवन की इस यात्रा में, बस नई उम्मीदों का साथ।

 

बासी कढ़ी में उबाल नहीं आता शायरी

आशा है कि आपको इस मुहावरे की समझ आ गई होगी और आप इसका सही प्रयोग कर पाएंगे।


Hindi to English Translation of बासी कढ़ी में उबाल नहीं आता – Basi kadhi mein ubaal nahi aata Proverb:

Introduction: The Hindi proverb “Basi kadhi mein ubaal nahi aata” reflects the irrelevance of old and inactive ideas or practices in the context of life and society. It signifies that things that have become outdated over time lack freshness or enthusiasm.

Meaning: The literal meaning of this proverb is that just as stale curry (Basi kadhi mein ubaal nahi aata) doesn’t boil, similarly, old and obsolete ideas lack novelty or energy.

Usage: This proverb is used in situations where an old tradition or ideology is not effective in a contemporary context.

Examples:

-> In society, some old practices that are not useful in today’s time can be referred to with this proverb.

-> It can also be applied to old and ineffective methodologies in an organization.

Conclusion: The proverb “Basi kadhi mein ubaal nahi aata” teaches us that life and society always need novelty and relevance. Old ideas and practices need to be updated over time to face new and contemporary challenges. It tells us that continuous change and innovation are essential for progress.

Story of Basi kadhi mein ubaal nahi aata Proverb in English:

Once upon a time, in a small village, there lived a young man named Vikas. Vikas had returned to his village after completing his education in the city. He noticed that many old practices and methods were still prevalent in the village, which were no longer effective with the changing times.

One day, a meeting was held in the village to discuss its development. Vikas suggested that the village’s traditional farming methods should be replaced with modern techniques. However, the village elders rejected his suggestion, insisting that the old methods were better.

Vikas then said, “Basi kadhi mein ubaal nahi. We need to abandon our old ways and adopt new methods that are effective and useful with time.”

Vikas implemented modern techniques in his field, and within a short period, there was a significant increase in the yield of his farms. Gradually, other farmers in the village also started adopting Vikas’s methods.

This story teaches us that change with time is essential, and old, ineffective practices should be replaced with new and effective ones. “Basi kadhi mein ubaal nahi” means that old methods become ineffective over time.

 

I hope this gives you a clear understanding of the proverb and how to use it correctly.

FAQ:

इस कहावत का प्रयोग किस संदर्भ में किया जाता है?

इस कहावत का उपयोग तब किया जाता है जब व्यक्ति या स्थितियां पुरानी और अप्रभावी हो चुकी हों और नई ऊर्जा या विचारों की कमी हो।

क्या यह कहावत नकारात्मक संदर्भ में इस्तेमाल होती है?

हां, अक्सर यह कहावत नकारात्मक संदर्भ में इस्तेमाल होती है, जब किसी चीज़ को पुराना और अप्रभावी माना जाता है।

क्या इस कहावत का कोई सकारात्मक उपयोग भी हो सकता है?

सामान्यतः यह कहावत सकारात्मक संदर्भ में कम ही इस्तेमाल होती है, लेकिन यह नवीनताऔर परिवर्तन की महत्वता पर बल देने के लिए प्रयोग की जा सकती है।

इस कहावत का अन्य भाषाओं में क्या समकक्ष हो सकता है?

अन्य भाषाओं में भी समानार्थी कहावतें हो सकती हैं, जैसे कि “ओल्ड हैबिट्स डाई हार्ड” या “सेम ओल्ड, सेम ओल्ड”।

क्या इस कहावत को आज के युवा पीढ़ी के लिए समझाना संभव है?

हां, इसे आज के युवा पीढ़ी के लिए उदाहरण और संदर्भों के माध्यम से समझाया जा सकता है, खासकर उनके दैनिक जीवन और अनुभवों से जुड़े संदर्भों में।

इस कहावत का व्यावहारिक जीवन में क्या उपयोग हो सकता है?

व्यावहारिक जीवन में, यह कहावत नवाचार, परिवर्तन और नए विचारों को अपनाने के महत्व पर जोर देने में मदद कर सकती है, विशेषकर कामकाजी वातावरण और शैक्षिक क्षेत्रों में।

इस कहावत को आधुनिक समाज में किस प्रकार देखा जा सकता है?

आधुनिक समाज में, इस कहावत को एक प्रेरणादायक संदेश के रूप में देखा जा सकता है जो लोगों को पुराने तरीकों से बाहर निकलने और नई और रचनात्मक सोच को अपनाने की प्रेरणा देती है।

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